KAZA TOUR 1

DATE 8.10.2017 First Day

आखिरकार वो दिन आ ही गया जिसका काफी दिनों से इंतज़ार थाI कुछ दोस्तों ने कहीं जाने का प्रोग्राम बनायाI महानवमी  को दिन शुक्रवार तारीख 8I10I2017 को सुबह 4 बजे अँधेरे में अपने 4 दोस्तों के साथ निकल लिएI बंगारी जी की गाड़ी थी हुंडई की आई10I साथ में चलने वाले दोस्तों के नाम थे  श्री राधे श्याम जी, श्री नंदन सिंह बंगारी, श्री सुभाष जी, श्री बीरबल मीणा जी और मै स्वयं राजीव कुमारI पहाड़ सदा से ही मनुष्य को अपनी ओर आकर्षित करते है तो हमने भी पहाड़ो  की ओर रुख किया और तय किया की शिमला से काजा  होते हुए मनाली और फिर आखिर में दिल्ली आएँगेI सफर में जो भी आपस में अजनबी थे धीरे धीरे एक दूसरे से खुलते जा रहे थे क्योकि सभी की मंज़िल एक ही थी और परिवार के नाम पर उस समय हम पांच ही थे क्योकि अपने अपने परिवार सभी दिल्ली छोड़कर जा रहे थेI


सुबह जल्दी चलने का फ़ायदा यह होता है की दिल्ली का जाम  नहीं मिलताI सभी रोमांच से भरे हुए थेI सुबह 8 बजे के करीब सभी को भूख ने घेर लियाI सभी की राय से एक पंक्चर वाले के साथ वाले ढाबे पर गाड़ी रोक दी गई तथा अपनी स्टपनी में पंक्चर भी लगवा लियाI उसी के साथ एक दुकान से छाछ भी ली और नाश्ते जोकि घर से ही लाए थे मजेदार पूरी और आलू की सब्जी साथ में  छाछI सभी की राय से 2 लीटर छाछ और ले ली गईI अब गाड़ी पूरी तरह से फर्राटा भरते हुए पंचकुला  को पार  कर रही थी और साथ ही हमारा मन भीI पास ही में चंडी देवी का मंदिर भी गूगल मैप दिखा रहा थाI बड़ा ही मजेदार दृश्य थाI छोटे छोटे पहाड़ो को पार करते हुए गाड़ी शिमला की तरफ जा रही थीI अब धीरे धीरे चढाई आनी शुरू हो गईI हाईवे का काम चलने के कारण एक साइड से ही ट्रैफिक चल रहा थाI थोड़ी देर बाद बीरबल जी ने बोला की गूगल मैप शिमला के पास लाल रोड दिखा रहा है जिसका मतलब जाम थाI सभी को अचम्भा हुआ और किसी ने भी इस बात पर यकीन नहीं किया की इस मौसम शिमला में जाम क्यों होगाI लेकिन सच्चाई  यही थी और थोड़ी देर बाद एक बोर जाम मिलाI करीब 2-3 घंटे जाम में फंसने के बाद हम कुफरी पहुंचेI



अब सभी को काफी भूख लग चुकी थीI एक सुंदर सी जगह देखकर सभी ने लंच खोल लियाI ऐसी सुंदर जगह लंच का मजा अलग ही थाI शानदार कुफरी का नजाराI  लंच से फ्री होकर फिर सीधे जेओरी की ओर रुख कियाI लेकिन सेब का सीजन होने के कारण जगह जगह जाम लगा हुआ थाI उसी चक्कर में एक जगह रास्ता भूल गएI रास्ता दो हिस्से में  बंटा हुआ था  कुछ समझ न आने के कारण लोकल पब्लिक से पूछकर आगे बढे लेकिन ये रास्ता कोई लोकल रास्ता थाI हम लोग हाईवे छोड़ चुके थेI शाम का टाइम और छोटा सा सिंगल  रास्ता बड़ा अजीब लग रहा थाI गूगल मैप पर देखने के कारण पता लगा हाईवे अभी 15 किलोमीटर हैI जैसे तैसे रास्ता कटाI अँधेरा घिर आया थाI जैसे ही हाईवे पर वापस आए मजा आ गयाI साथ में सतलूज नदी बह रही थीI कुछ ही देर में रामपुर शहर आ गयाI जिसे पार करने पर झाकड़ी आया लेकिन हमारी मंज़िल तो जेओरी थाI जेओरी से कुछ ही पहले एक ढाबे पर रुके और अपने डिनर का काम निपटायाI
अंत में जेओरी भी आया रात के करीब  9 बज चुके थेI वही पर एक मंदिर में हमारे रुकने का इंतज़ाम थाI हमारे एक मित्र श्री अनिल शर्मा जी का वहां काफी आना जाना हैI उन्ही ने हम इस मंदिर के बारे में बताया और हमारे रुकने का इंतज़ाम करवायाI मंदिर बहुत ही शानदार जगह बना हुआ थाI चन्द्रमा अपनी पूरी चांदनी बिखेर रहा थाI हमारे कमरे से लगती हुई एक छोटी सी पानी की धारा थी जिसकी  मधुर आवाज कानो को बहुत अच्छी लग रही थीI पुरे दिन के थके हुए होने के कारण सभी सो गएI

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